😂 "गाँव का नेता – भोला"
भाग 1 – नेता बनने का सपना
गाँव “कुंभपुर” का भोला बड़ा ही हँसमुख और अजीब किस्म का आदमी था। उसकी एक ही तमन्ना थी – गाँव का नेता बनना।
लोग कहते –
“भोला, तू नेता बनेगा? तेरी तो अंग्रेज़ी सुनकर ही लोग हँस-हँसकर गिर पड़ेंगे।”
भोला गर्व से कहता –
“नेता को अंग्रेज़ी नहीं, वादा करना आना चाहिए।”
भाग 2 – चुनावी स्टाइल
गाँव में पंचायत चुनाव का ऐलान हुआ। भोला ने पर्चा भर दिया।
पहला भाषण दिया –
“मेरे प्यारे देशवासियों… ओह माफ कीजिए, गाँववासियों! अगर मैं जीत गया तो हर गली में AC लगवाऊँगा।”
गाँव वाले बोले – “अरे भोला, बिजली ही 6 घंटे आती है, AC कैसे चलेगा?”
भोला तुरंत बोला – “तो पहले 24 घंटे बिजली दिलवाऊँगा।”
भाग 3 – अजीब-अजीब वादे
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औरतों से कहा – “हर घर में मुफ्त मेहंदी मिलेगी।”
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बच्चों से कहा – “स्कूल में होमवर्क बंद कर दूँगा।”
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बुज़ुर्गों से कहा – “पेंशन के साथ मुफ़्त चाय भी मिलेगी।”
गाँव वाले हँस-हँसकर लोटपोट हो गए।
भाग 4 – भाषण की तबाही
एक बार भोला ने मंच पर चढ़कर अंग्रेज़ी मिलाकर भाषण दिया –
“Friends and villagers, vote for me… मैं very-very honest आदमी हूँ।”
भीड़ से आवाज़ आई –
“भोला, तूने पिछले हफ्ते ही पनवाड़ी से उधार लिया था, अब तक दिया नहीं।”
भोला बोला – “अरे वो honesty टेस्ट था!”
भाग 5 – चुनाव प्रचार की नयी तरकीब
भोला ने प्रचार के लिए गधे पर बैठकर रैली निकाली। उसके सिर पर लाल टोपी और गले में माला।
गधे को रोक-रोक कर लोगों से कहता –
“देखो, ये गधा भी चाहता है कि भोला जीते।”
गाँव वाले बोले – “गधे की शक्ल तो बता रही है कि वो खुद भागना चाहता है।”
भाग 6 – वोटिंग का दिन
चुनाव वाले दिन भोला सुबह 5 बजे से ही गाँव वालों को जगाने लगा –
“चलो-चलो, भोला को वोट दो। वोट डालने से दूध मुफ्त मिलेगा।”
लोग बोले – “अरे भोला, तू कब से डेयरी वाला बन गया?”
भोला बोला – “अरे चुनावी वादा है, बाद में सोच लेंगे।”
भाग 7 – नतीजा और ड्रामा
गिनती शुरू हुई। पहले घंटे में ही भोला पीछे हो गया।
भोला ने कहा – “EVM में गड़बड़ी है।”
अफसर ने कहा – “भोला, गड़बड़ी तो तभी होगी जब तेरे नाम पर वोट पड़े हों।”
आख़िरकार नतीजा आया – भोला को कुल 11 वोट मिले, जबकि उसके घर के 12 लोग थे।
भोला चिल्लाया – “एक वोट किसने दिया नहीं?”
उसकी बीवी बोली – “मैंने तो पड़ोसी को दिया, तू तो हमेशा घर का नल भी ठीक नहीं करता।”
भाग 8 – असली नेता कौन?
भोला हार गया, लेकिन अगले दिन चाय की दुकान पर बोला –
“नेता वही है जो हारकर भी भाषण दे।”
फिर खड़ा होकर बोला –
“गाँववालो, मैं हारा नहीं हूँ… मैं अगली बार और बड़ी तैयारी करूँगा। तब तक आप सब मेरी चाय पीते रहो।”
😂 सीख इस कहानी से:
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नेता बनना आसान है, लेकिन जनता को बेवकूफ़ बनाना आसान नहीं।
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वादे ऐसे करो जो पूरे किए जा सकें, वरना गधा भी नाराज़ हो जाएगा।
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और सबसे बड़ी सीख – घर में बीवी का वोट पक्का होना चाहिए।

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