महोबा में आयकर विभाग की बड़ी छापेमारी
कबरई स्टोन क्रेशर मंडी में कई प्लांटों पर कार्रवाई, पूर्व बसपा प्रत्याशी के ठिकाने जांच के घेरे में
महोबा | विशेष रिपोर्ट | जनता मित्र
बुंदेलखंड के महोबा जिले में बुधवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया जब आयकर विभाग की कई टीमों ने एक साथ कबरई की प्रसिद्ध स्टोन क्रेशर मंडी में छापेमारी शुरू कर दी। दर्जनों गाड़ियों के काफिले के साथ पहुंचे आयकर अधिकारियों ने कई बड़े क्रेशर प्लांटों को घेर लिया और वहां मौजूद कर्मचारियों व प्रबंधन से जुड़े लोगों से पूछताछ शुरू कर दी।
इस कार्रवाई का मुख्य केंद्र पूर्व बसपा प्रत्याशी दिलीप सिंह के जगदंबा ग्रेनाइट प्लांट और कारोबारी सोमेश भारद्वाज के श्रिया ग्रेनाइट प्लांट को बताया जा रहा है। आयकर विभाग की टीमों ने इन प्लांटों पर दस्तावेजों की गहन जांच शुरू कर दी है।
बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई अवैध कमाई, टैक्स चोरी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की शिकायतों के आधार पर की जा रही है। आयकर विभाग के अधिकारियों ने कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखते हुए सुबह-सुबह छापा डाला, जिससे कई कारोबारी अपने प्लांट छोड़कर मौके से चले गए।
इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी जनता मित्र (Janta Mitra) को स्थानीय सूत्रों और प्रत्यक्षदर्शियों से मिली है।
कबरई स्टोन क्रेशर मंडी क्यों है महत्वपूर्ण
महोबा जिले का कबरई क्षेत्र पूरे बुंदेलखंड में स्टोन क्रेशर उद्योग का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है। यहां सैकड़ों की संख्या में स्टोन क्रेशर प्लांट संचालित होते हैं, जहां से पत्थर और गिट्टी देश के कई राज्यों में सप्लाई की जाती है।
कबरई की पहाड़ियों में पाए जाने वाले कठोर पत्थर को तोड़कर निर्माण कार्यों में उपयोग होने वाली सामग्री बनाई जाती है। उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली तक यहां से गिट्टी और पत्थर भेजे जाते हैं।
स्थानीय अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा इसी उद्योग पर निर्भर करता है। हजारों मजदूर इस उद्योग से जुड़े हुए हैं। लेकिन समय-समय पर इस उद्योग पर अवैध खनन, टैक्स चोरी और बेनामी कारोबार के आरोप भी लगते रहे हैं।
जनता मित्र की टीम को मिली जानकारी के अनुसार, कबरई क्षेत्र में लगभग कई सौ क्रेशर प्लांट सक्रिय हैं, जिनका कारोबार करोड़ों रुपये में होता है।
सुबह अचानक पहुंची आयकर विभाग की टीमें
बुधवार सुबह करीब 6 बजे आयकर विभाग की कई गाड़ियां एक साथ कबरई स्टोन क्रेशर मंडी में पहुंचीं। इन गाड़ियों में आयकर अधिकारियों के अलावा सुरक्षा के लिए पुलिस बल भी मौजूद था।
जैसे ही अधिकारी प्लांटों में पहुंचे, उन्होंने सबसे पहले पूरे परिसर को घेर लिया और कर्मचारियों को बाहर जाने से रोक दिया। इसके साथ ही वहां मौजूद लोगों के मोबाइल फोन भी जब्त कर लिए गए ताकि किसी प्रकार की सूचना बाहर न जा सके।
टीमों ने प्लांट के कार्यालयों, अकाउंट सेक्शन और कंप्यूटर सिस्टम की जांच शुरू कर दी। कई जगहों पर हार्ड डिस्क और दस्तावेज भी कब्जे में लिए गए।
इस दौरान मीडिया को भी प्लांट परिसर के पास जाने की अनुमति नहीं दी गई। हालांकि जनता मित्र को स्थानीय सूत्रों से कार्रवाई से जुड़ी अहम जानकारी मिलती रही।
किन प्लांटों पर हुई कार्रवाई
आयकर विभाग की कार्रवाई मुख्य रूप से दो बड़े कारोबारी समूहों पर केंद्रित बताई जा रही है।
1. जगदंबा ग्रेनाइट प्लांट
यह प्लांट पूर्व बसपा प्रत्याशी दिलीप सिंह से जुड़ा बताया जाता है। यह क्षेत्र के बड़े स्टोन क्रेशर प्लांटों में से एक माना जाता है।
2. श्रिया ग्रेनाइट प्लांट
यह प्लांट कारोबारी सोमेश भारद्वाज का बताया जा रहा है, जिनका कारोबार कई जिलों में फैला हुआ बताया जाता है।
इन दोनों प्लांटों के अलावा आसपास के कुछ अन्य संबंधित ठिकानों पर भी जांच की जा रही है।
कानपुर, बांदा और मध्य प्रदेश से आई संयुक्त टीम
सूत्रों के अनुसार इस कार्रवाई में आयकर विभाग की कई टीमों ने हिस्सा लिया है। इनमें कानपुर, बांदा और मध्य प्रदेश से आए अधिकारी शामिल हैं।
कहा जा रहा है कि यह जांच केवल महोबा तक सीमित नहीं है, बल्कि मध्य प्रदेश में स्थित कुछ क्रेशर प्लांटों और कारोबारी ठिकानों पर भी एक साथ कार्रवाई की जा रही है।
जनता मित्र को मिली जानकारी के अनुसार, यह छापेमारी कई जिलों में फैले कारोबारी नेटवर्क की जांच का हिस्सा हो सकती है।
कर्मचारियों के मोबाइल फोन किए गए जब्त
आयकर विभाग की टीम ने छापेमारी शुरू होते ही कर्मचारियों के मोबाइल फोन जब्त कर लिए।
ऐसा इसलिए किया गया ताकि किसी प्रकार की जानकारी बाहर न जा सके और दस्तावेजों को छिपाने या नष्ट करने की कोशिश न की जाए।
इसके अलावा प्लांट के अंदर और बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है ताकि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति अंदर या बाहर न जा सके।
मंडी में मचा हड़कंप
छापेमारी की खबर फैलते ही कबरई स्टोन क्रेशर मंडी में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
कई छोटे और मध्यम स्तर के क्रेशर संचालक अपने प्लांटों में ताला लगाकर वहां से चले गए। कुछ जगहों पर काम भी रोक दिया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर आयकर विभाग की कार्रवाई पहले कभी नहीं देखी गई।
करोड़ों के लेनदेन की जांच
सूत्रों के अनुसार आयकर विभाग को कुछ ऐसे दस्तावेज मिले हैं जिनमें करोड़ों रुपये के लेनदेन का विवरण है।
इन दस्तावेजों में कई संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन और नकद लेनदेन का भी उल्लेख बताया जा रहा है।
टीम अब इन दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रही है।
बेनामी संपत्तियों की भी जांच
बताया जा रहा है कि जांच के दौरान कुछ ऐसी संपत्तियों के दस्तावेज भी मिले हैं जो संभवतः बेनामी हो सकती हैं।
आयकर विभाग अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि इन संपत्तियों के वास्तविक मालिक कौन हैं और इनका पैसा कहां से आया।
राजनीतिक कनेक्शन भी जांच के दायरे में
पूर्व बसपा प्रत्याशी दिलीप सिंह का नाम सामने आने के कारण इस कार्रवाई को राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
दिलीप सिंह 2019 के लोकसभा चुनाव में हमीरपुर-महोबा-तिंदवारी सीट से बसपा के उम्मीदवार थे। हालांकि वे चुनाव जीत नहीं पाए थे, लेकिन क्षेत्र की राजनीति में उनका प्रभाव माना जाता है।
इसी वजह से इस छापेमारी ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल मचा दी है।
मीडिया को रखा गया दूर
आयकर विभाग की टीम ने कार्रवाई के दौरान मीडिया को घटनास्थल से दूर रखा।
किसी भी अधिकारी ने आधिकारिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है।
हालांकि जनता मित्र को सूत्रों के हवाले से यह जानकारी मिली है कि जांच अभी जारी है और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
बुंदेलखंड में स्टोन क्रेशर उद्योग पर पहले भी उठे सवाल
यह पहला मौका नहीं है जब बुंदेलखंड के स्टोन क्रेशर उद्योग पर सवाल उठे हैं।
पिछले कई वर्षों में अवैध खनन, पर्यावरण नियमों के उल्लंघन और टैक्स चोरी को लेकर कई शिकायतें सामने आती रही हैं।
कई बार प्रशासन और खनन विभाग द्वारा कार्रवाई भी की गई है, लेकिन उद्योग का बड़ा नेटवर्क होने के कारण पूरी तरह नियंत्रण करना चुनौतीपूर्ण माना जाता है।
पर्यावरण से जुड़े विवाद
स्टोन क्रेशर उद्योग को लेकर पर्यावरण से जुड़े मुद्दे भी लंबे समय से उठते रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्रेशर प्लांटों से निकलने वाली धूल और प्रदूषण से आसपास के गांवों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
इसके अलावा पहाड़ियों के अत्यधिक खनन से पर्यावरण संतुलन पर भी खतरा बताया जाता है।
आयकर विभाग की जांच आगे बढ़ेगी
आयकर विभाग के अधिकारियों के अनुसार इस तरह की कार्रवाई में कई दिन तक जांच चल सकती है।
दस्तावेजों की जांच, बैंक खातों का विश्लेषण और संपत्तियों की जानकारी जुटाने में समय लगता है।
संभव है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।
स्थानीय लोगों की प्रतिक्रिया
छापेमारी की खबर से स्थानीय लोगों में भी चर्चा का माहौल है।
कुछ लोगों का कहना है कि यदि अवैध तरीके से पैसा कमाया गया है तो उस पर कार्रवाई होना जरूरी है।
वहीं कुछ लोग इसे राजनीतिक और कारोबारी प्रतिस्पर्धा से जोड़कर भी देख रहे हैं।
आने वाले दिनों में हो सकते हैं बड़े खुलासे
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयकर विभाग को बड़े पैमाने पर टैक्स चोरी या मनी लॉन्ड्रिंग के सबूत मिलते हैं तो कई अन्य कारोबारी भी जांच के दायरे में आ सकते हैं।
संभव है कि इस कार्रवाई के बाद बुंदेलखंड के स्टोन क्रेशर उद्योग में बड़े बदलाव देखने को मिलें।



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