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| फोटो साभार: जनता मित्र न्यूज़ डेस्क - मानवीय गरिमा और इच्छामृत्यु पर कानूनी विमर्श |
जनता मित्र विशेष: क्या है इच्छामृत्यु (Euthanasia)? भारत में पहली बार मिली ऐतिहासिक मंजूरी; जानें क्या कहता है कानून और दुनिया के नियम
नई दिल्ली | कानूनी डेस्क – जनता मित्र
भारत के न्यायिक इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भावुक कर देने वाला फैसला सामने आया है। 'इच्छामृत्यु' जिसे अंग्रेजी में 'यूथेनेसिया' (Euthanasia) कहा जाता है, उसे लेकर भारत में पहली बार एक विशिष्ट मामले में मंजूरी दी गई है। 'जनता मित्र' की इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर इच्छामृत्यु क्या है, भारत में इसका कानून क्या है और दुनिया के अन्य देशों में इसे लेकर क्या प्रावधान हैं।
भारत के न्यायिक इतिहास में एक अत्यंत महत्वपूर्ण और भावुक कर देने वाला फैसला सामने आया है। 'इच्छामृत्यु' जिसे अंग्रेजी में 'यूथेनेसिया' (Euthanasia) कहा जाता है, उसे लेकर भारत में पहली बार एक विशिष्ट मामले में मंजूरी दी गई है। 'जनता मित्र' की इस विशेष रिपोर्ट में हम विस्तार से समझेंगे कि आखिर इच्छामृत्यु क्या है, भारत में इसका कानून क्या है और दुनिया के अन्य देशों में इसे लेकर क्या प्रावधान हैं।
क्या है इच्छामृत्यु (Euthanasia)?
सरल शब्दों में कहें तो जब कोई व्यक्ति ऐसी लाइलाज बीमारी (Incurable Disease) से पीड़ित हो, जिसमें दर्द असहनीय हो और सुधार की कोई गुंजाइश न हो, तो उसे पीड़ा से मुक्ति दिलाने के लिए डॉक्टर की मदद से मृत्यु देना 'इच्छामृत्यु' कहलाता है।
यह मुख्य रूप से दो प्रकार की होती है:
- सक्रिय इच्छामृत्यु (Active Euthanasia): इसमें डॉक्टर मरीज को घातक दवा या इंजेक्शन देकर उसकी जान लेते हैं। (भारत में यह अवैध है)।
- निष्क्रिय इच्छामृत्यु (Passive Euthanasia): इसमें मरीज को जीवित रखने वाले लाइफ सपोर्ट सिस्टम (जैसे वेंटिलेटर या फीडिंग ट्यूब) को हटा दिया जाता है। भारत में सुप्रीम कोर्ट ने 2018 में इसे 'लिविंग विल' (Living Will) के साथ कानूनी मान्यता दी थी।
इतिहास के पन्नों में इच्छामृत्यु का जिक्र
इच्छामृत्यु का विचार नया नहीं है। प्राचीन काल में भी इसका जिक्र मिलता है:
- प्राचीन ग्रीस और रोम: सुकरात और प्लेटो जैसे दार्शनिकों के समय में भी गंभीर बीमारियों के दौरान सम्मानजनक मृत्यु की चर्चा होती थी।
- भारतीय संस्कृति: हिंदू धर्म में 'प्रायोपवेश' (आमरण अनशन द्वारा देह त्याग) और जैन धर्म में 'संलेखना' जैसी परंपराएं रही हैं, हालांकि इन्हें धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से देखा जाता है, कानूनी दृष्टि से नहीं।
भारत में पहली बार मिली मंजूरी: हालिया मामला
हाल ही में एक दुर्लभ मामले में, एक मरीज जो कई वर्षों से 'पर्जिस्टेंट वेजिटेटिव स्टेट' (PVS) में था और जिसके बचने की कोई उम्मीद नहीं थी, उसके परिजनों की याचिका पर अदालत ने चिकित्सा विशेषज्ञों की राय के बाद जीवन रक्षक प्रणाली हटाने की अनुमति दी है। यह फैसला 'सम्मान के साथ मरने के अधिकार' (Right to Die with Dignity) को अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा मानता है।
दुनिया भर में क्या हैं नियम?
अलग-अलग देशों में इच्छामृत्यु को लेकर कानून अलग-अलग हैं:
- नीदरलैंड और बेल्जियम: ये दुनिया के पहले देश थे जिन्होंने सक्रिय इच्छामृत्यु को कानूनी मान्यता दी।
- स्विट्जरलैंड: यहाँ 'असिस्टेड सुसाइड' (Assisted Suicide) कानूनी है, जहाँ डॉक्टर की मदद से मरीज खुद अपनी जान ले सकता है।
- अमेरिका: यहाँ के कुछ राज्यों (जैसे ओरेगन, कैलिफोर्निया) में इसकी अनुमति है, लेकिन नियम बहुत सख्त हैं।
- ब्रिटेन और फ्रांस: यहाँ अभी भी इसे लेकर कड़ी कानूनी और नैतिक बहस जारी है और पूर्ण मंजूरी नहीं मिली है।
निष्कर्ष: जनता मित्र की राय
इच्छामृत्यु का विषय कानून से ज्यादा नैतिकता और संवेदनाओं से जुड़ा है। भारत में निष्क्रिय इच्छामृत्यु को मिली मंजूरी उन परिवारों के लिए एक राहत है जो अपने प्रियजनों को असहनीय पीड़ा में देख रहे हैं। हालांकि, इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए बनाए गए 'सेफगार्ड्स' और 'लिविंग विल' की प्रक्रिया को समझना हर नागरिक के लिए जरूरी है।
प्रस्तुति: जनता मित्र न्यूज़ डेस्क
(सटीक खबरें, सबसे पहले)
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