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| फोटो साभार: जनता मित्र न्यूज़ डेस्क - ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच उड़ान भरता विमान |
जनता मित्र विशेष: हवाई सफर पर महंगाई की मार! मिडिल-ईस्ट संकट ने बढ़ाई ATF की कीमतें; क्या अब आम आदमी की पहुँच से दूर होगी फ्लाइट?
नई दिल्ली | आर्थिक डेस्क – जनता मित्र
अगर आप आने वाले दिनों में हवाई यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। 'जनता मित्र' के विशेष आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, मिडिल-ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर अब आपके फ्लाइट टिकटों पर पड़ने वाला है। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल के कारण विमानन ईंधन यानी ATF (Aviation Turbine Fuel) की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
अगर आप आने वाले दिनों में हवाई यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो अपनी जेब थोड़ी ज्यादा ढीली करने के लिए तैयार हो जाइए। 'जनता मित्र' के विशेष आर्थिक विश्लेषण के अनुसार, मिडिल-ईस्ट (पश्चिम एशिया) में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर अब आपके फ्लाइट टिकटों पर पड़ने वाला है। कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल के कारण विमानन ईंधन यानी ATF (Aviation Turbine Fuel) की कीमतों में रिकॉर्ड बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
जानकारों का मानना है कि एयरलाइंस कंपनियां अपने बढ़ते खर्च का बोझ यात्रियों पर डालने की तैयारी कर रही हैं, जिससे हवाई किराए में 10% से 15% तक की वृद्धि हो सकती है।
ईंधन की कीमतों में आग क्यों? (जनता मित्र विश्लेषण)
मिडिल-ईस्ट दुनिया का सबसे बड़ा तेल उत्पादक क्षेत्र है। वहां जारी तनाव के कारण सप्लाई चेन बाधित हुई है:
- कच्चे तेल का उछाल: ब्रेंट क्रूड की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में अस्थिर बनी हुई हैं। चूंकि ATF की कीमत कच्चे तेल पर निर्भर करती है, इसलिए तेल कंपनियों ने इसके दाम बढ़ा दिए हैं।
- रूट का बदलाव: युद्ध के कारण कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को अपना रास्ता बदलना पड़ रहा है (लंबा रूट), जिससे ईंधन की खपत बढ़ गई है और एयरलाइंस का ऑपरेशनल खर्च भी ऊपर चला गया है।
- डॉलर की मजबूती: वैश्विक अनिश्चितता के बीच डॉलर मजबूत हो रहा है, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देशों के लिए ईंधन खरीदना और महंगा हो गया है।
किन रूट्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
विमानन विशेषज्ञों के अनुसार, खाड़ी देशों (दुबई, कतर, सऊदी अरब) और यूरोप जाने वाली अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के किराए सबसे पहले बढ़ेंगे। घरेलू उड़ानों (जैसे दिल्ली-मुंबई, बेंगलुरु-चेन्नई) पर भी इसका असर दिखना शुरू हो गया है, क्योंकि भारतीय एयरलाइंस के कुल खर्च का लगभग 40% हिस्सा केवल ईंधन पर खर्च होता है।
आम जनता के लिए क्या है विकल्प?
जनता मित्र की सलाह है कि अगर आपको आने वाले महीनों में यात्रा करनी है, तो टिकटों की एडवांस बुकिंग करना ही समझदारी होगी। अंतिम समय में बुकिंग करने पर आपको सामान्य से दो गुना ज्यादा किराया चुकाना पड़ सकता है।
प्रस्तुति: जनता मित्र न्यूज़ डेस्क
(सटीक खबरें, सबसे पहले)
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